आजकल शहरों और गांवों दोनों में प्लॉटिंग का चलन तेजी से बढ़ रहा है। हर जगह कॉलोनाइज़र और प्रॉपर्टी डीलर आसान किस्तों पर प्लॉट देने का लालच दिखा रहे हैं। कई जगह तो यह भी कहा जाता है कि बिना पैसा लाए सिर्फ आधार कार्ड पर प्लॉट मिल जाएगा और बाद में किस्तों में भुगतान कर दें। सवाल यह है कि क्या सच में किस्तों पर प्लॉट खरीदना सुरक्षित है या नहीं? आइए इसे आसान भाषा में समझते हैं।
किस्तों पर प्लॉट क्यों ज्यादा ऑफर किए जाते हैं
मार्केट में प्लॉटिंग का बिजनेस काफी बढ़ गया है। जब किसी कॉलोनी के प्लॉट नहीं बिकते, तो डीलर इंस्टॉलमेंट पर बेचने की रणनीति अपनाते हैं। कुछ डीलर तो बैंक लोन कराने का वादा करते हैं, लेकिन असलियत में अक्सर वे प्रॉपर्टी लोन की जगह पर्सनल लोन करा देते हैं।
यही वह जगह है जहां लोग सबसे ज्यादा गलती कर बैठते हैं।
पर्सनल लोन से प्लॉट खरीदना क्यों खतरे से खाली नहीं
बहुत से खरीदार सोचते हैं कि लोन मिल गया तो सब ठीक है। पर सच्चाई बिल्कुल उलट होती है।
पर्सनल लोन लेने पर आपको दो बड़ी परेशानियां होती हैं
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लोन की ब्याज दर बहुत ज्यादा होती है
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बैंक प्रॉपर्टी की कोई जांच नहीं करता
अगर बाद में पता चले कि प्लॉट विवादित है, नकली है या किसी और के नाम का है, तो खरीदार पूरी तरह फंस जाता है।
पर्सनल लोन और प्रॉपर्टी लोन में फर्क समझना बेहद जरूरी है।
प्रॉपर्टी लोन हमेशा बैंक से ही क्यों कराना चाहिए
अगर प्लॉट की कीमत 10 लाख, 15 लाख, 20 लाख या उससे ज्यादा है, तो इसे बिना जांच परख खरीदना बड़ा जोखिम है।
बैंक से प्रॉपर्टी लोन कराने का सबसे बड़ा फायदा यह है कि बैंक खुद सारी जांच करता है, जैसे
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प्रॉपर्टी की रजिस्ट्री
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पिछले मालिक का रिकॉर्ड
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जमीन पर कोई पुराना लोन तो नहीं
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जमीन विवादित तो नहीं
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जमीन का मोटेशन
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टैक्स की रसीद
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जमीन किसके नाम पर है
बैंक अपनी तरफ से पूरी जांच करता है, क्योंकि उसी को पैसा फाइनेंस करना है।
अगर जमीन में खामियां होंगी, तो बैंक लोन ही पास नहीं करेगा।
इससे खरीदार का बड़ा नुकसान होने से बच जाता है।
इंस्टॉलमेंट प्लॉट में सबसे बड़ा खेल
कई कॉलोनाइजर खुद से किस्त बनाकर प्लॉट बेचते हैं। यह तरीका तब ठीक है जब जमीन छोटी हो, कीमत कम हो और एरिया लोकल हो।
लेकिन जब जमीन का मूल्य लाखों में होता है, तो इंस्टॉलमेंट पर प्लॉट खरीदना भारी गलती साबित हो सकती है।
कारण यह कि
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कॉलोनाइजर अपनी जमीन कई गुना महंगी बेचता है
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कागजात अधूरे हो सकते हैं
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भविष्य में विवाद की संभावना रहती है
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रजिस्ट्री से पहले पूरा पैसा ले लिया जाता है
अगर लोन बैंक से नहीं होता, तो खरीददार को खुद सारी जांच करनी पड़ती है, जो आम लोग सही तरीके से नहीं कर पाते।
पर्सनल लोन या प्रॉपर्टी लोन – कौन सा सही
पर्सनल लोन
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ब्याज दर 14 से 22 प्रतिशत
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2 से 5 साल की अवधि
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बिना प्रॉपर्टी जांच के
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पूरा जोखिम खरीदार का
प्रॉपर्टी लोन
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ब्याज दर 8 से 12 प्रतिशत
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10 से 20 साल की अवधि
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बैंक खुद प्रॉपर्टी चेक करता है
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सुरक्षित और कम जोखिम
यानी साफ है कि प्रॉपर्टी लोन ज्यादा सुरक्षित और फायदेमंद है।
बड़ा प्लॉट खरीद रहे हैं तो ये नियम हमेशा अपनाएं
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लाखों रुपये की प्रॉपर्टी बिना बैंक लोन चेक के कभी मत खरीदें
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ब्रोकर अगर बैंक लोन कराने में बहाना बनाए तो वहां कुछ गड़बड़ जरूर है
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अगर आप कैश में खरीद रहे हैं तो पहले डॉक्यूमेंट एक्सपर्ट से पेपर चेक कराएं
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छोटे प्लॉट इंस्टॉलमेंट पर ले सकते हैं, लेकिन बड़े प्लॉट हमेशा बैंक लोन से ही लें
आखिर फैसला क्या है
किस्तों पर प्लॉट लेना गलत नहीं है, लेकिन समझदारी तभी है जब
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जमीन छोटी हो
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आप एरिया को जानते हों
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कीमत कम हो
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डॉक्यूमेंट साफ हों
लेकिन बड़ी रकम वाले प्लॉट सिर्फ और सिर्फ बैंक लोन के साथ ही खरीदें।
यह आपकी सुरक्षा है, भविष्य की गारंटी है और जमीन से जुड़े जोखिमों से बचने का सबसे आसान तरीका भी है।